भारत का व्यापार बढ़ाने के लिए वैश्विक पारगमन प्रणाली

भारत, संयुक्त राष्ट्र संघ के टीआईआर (TIR) संधि को स्वीकार करने वाला 71वां देश बना। आईआरयू (IRU), विश्व सड़क परिवहन संगठन द्वारा प्रबंधित एवं विकसित टीआईआर (TIR) एकमात्र वैश्विक पारगमन प्रणाली है।

Geneva, Switzerland, June 21, 2017 /India PRwire/ -- भारत, संयुक्त राष्ट्र संघ के टीआईआर (TIR) संधि को स्वीकार करने वाला 71वां देश बना। आईआरयू (IRU), विश्व सड़क परिवहन संगठन द्वारा प्रबंधित एवं विकसित टीआईआर (TIR) एकमात्र वैश्विक पारगमन प्रणाली है।

इस ऐतिहासिक निर्णय से भारत और उसके पड़ोसी देश, दक्षिण एशिया तथा इसके बाहर विदेश व्यापार एवं क्षेत्रीय एकीकरण के केन्द्र-बिन्दु होंगे, जिससे यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से व्यापार का हब बनाने की संभावनाओं के फास्ट ट्रैक पर आ गया है।

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टीआईआर (TIR) संधि, भारत की बहु-विधि परिवहन रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बेहतर कनेक्टिविटी से वैश्विक एवं क्षेत्रीय उत्पादन नेटवर्क के साथ अर्थव्यवस्था एकीकृत करना है।

अम्बार्टो डी प्रेटो, महासचिव, आईआरयू (IRU) ने कहा, ''टीआईआर (TIR) परिवार में भारत के शामिल होने का स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता है। मानकों से तालमेल बैठाने एवं दक्षिण एशिया में परिवहन, ट्रेड एवं विकास को बढ़ावा देने का यह महत्वपूर्ण कदम है।''

उन्होंने कहा कि ''हम भारत सरकार तथा कारोबारी समुदाय के साथ मिलकर काम करने हेतु तत्पर हैं, क्योंकि अब हमारा ध्यान यहां पर टीआईआर (TIR) प्रणाली लागू करना है।''

विश्व व्यापार संगठन की ओर से व्यापार सुविधा सहमति (ट्रेड फेसिलिटेशन एग्रीमेंट) को भारत में लागू करने हेतु टीआईआर (TIR) अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस संधि से सीमा पार सड़क परिवहन में सुधार हेतु भारत की मौजूदा राष्ट्रीय एवं बहुपक्षीय कनेक्टिविटी आधारित प्रयासों को बल मिलेगा, जिससे पूर्वी एवं पश्चिमी दोनों पड़ोसी देशों के साथ विदेश व्यापार बढ़ेगा।

टीआईआर (TIR) से म्यांमार, थाईलैंड के साथ-साथ बांग्लादेश, भूटान और नेपाल को एकजुट करने में भारत को सहयोग मिलेगा। इससे भारत अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (कोरिडोर), ईरान के चाबहार और उससे सटे अफगानिस्तान तथा ऊर्जा बाहुल्य यूरेशिया क्षेत्र से अपने माल (कार्गो) का आवागमन कर सकेगा।
टीआईआर (TIR) प्रणाली सीमा-शुल्क एवं कर को सुदृढ़ बनाती है तथा मजबूत गारंटी तंत्र उपलब्ध कराती है, जिससे व्यापारिक लागत कम करते हुए अंतर-क्षेत्रीय उच्चतर वृद्धि तथा अंतर-क्षेत्रीय व्यापार में सहूलियत होगी।

बोरिस ब्लैंच, आईआरयू (IRU) के प्रमुख प्रचालन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि, '' टीआईआर (TIR) प्रणाली लागू करने में भारत के निर्णय से व्यापार क्षेत्र में दूरगामी लाभ होंगे और सीमा पर होने वाली प्रक्रिया को स्ट्रीमलाइन करने में समय और धन में काफी बचत होगी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया और सीमा पर लगने वाले अनावश्यक समय में कमी आएगी।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने पुष्टि की है कि भारत में टीआईआर (TIR) संधि 6 महीने में प्रभावी हो जाएगी तथा प्रशिक्षण, विकास एवं इसे त्वरित लागू करने में सहूलियत के लिए आईआरयू (IRU) भारत के साथ मिलकर कार्य आरंभ कर देगा।

Notes to Editor

आईआरयू (IRU) के विषय में

आईआरयू (IRU) वैश्विक सड़क परिवहन संगठन है, जो जन और धन की सतत् गतिशीलता से आर्थिक वृद्धि, समृद्धि तथा संरक्षा को बढ़ावा देता है। आईआरयू (IRU) की स्थापना सन् 1948 में हुई जिसके 100 से अधिक देशों में सदस्य और गतिविधियां हैं।

टीआईआर (TIR) के विषय में

अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार वस्तु लाने-ले जाने हेतु वैश्विक सीमा पारगमन, टीआईआर (TIR) एकमात्र एवं सर्वाधिक सफल अंतर्राष्ट्रीय परिवहन साधन है, जिससे सीमा पर आवश्यक कार्रवाई जल्द, अधिक सु‍रक्षित और प्रभावी ढंग से होती है और परिवहन लागत में कमी के साथ-साथ व्यापार और विकास को बढ़ावा मिलता है।

टीआईआर (TIR) प्रणाली हेतु अपेक्षित न्यूनतम जनबल और सुविधाओं के अतिरिक्त सील की जांच तथा लोड कंपार्टमेंट अथवा कंटेनरों का निरीक्षण शामिल है, जिससे पारगमन में विलंब और सीमा पार करने में भारी-भरकम प्रकिया में कमी आएगी। इससे परिवहन लागत में काफी हद तक बचत होगी, जिससे प्रतिस्पर्धा और विकास में वृद्धि होगी। टीआईआर (TIR) के ''एकल पारगमन दस्तावेज'(सिंगल ट्रांजिट डाक्यूमेंट) से गलत जानकारी का जोखिम काफी हद तक कम होता है और केवल अनुमोदित ट्रांसपोर्टरों एवं वाहनों को ऑपरेट करने की अनुमति होती है।

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